UDAN

1.उड़े देश का आम नागरिक
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने और हवाई यात्रा को किफायती बनाने, विशेष रूप से टियर-II और टियर-III शहरों तक हवाई संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से अक्टूबर 2016 में उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना शुरू की गई थी। अपनी शुरुआत के बाद से इस योजना ने क्षेत्रीय विमानन परिदृश्य को बदल दिया है। इसके तहत 687 मार्गों को परिचालित किया गया है और 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्टों तथा जल हवाई अड्डों को जोड़ा गया है, जिससे 1.71 करोड़ से अधिक यात्रियों को लाभ हुआ है। मूल उड़ान योजना की सफलता और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप, माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 मार्च 2026 को दस वर्षों की अवधि के लिए ₹28,840 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ संशोधित उड़ान के शुभारंभ और कार्यान्वयन को मंजूरी दी। ‘संशोधित उड़ान’ योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 4 जुलाई 2026 को जोधपुर हवाई अड्डे से किया गया।
2. हवाई अड्डों का विकास
योजना का एक प्रमुख स्तंभ हवाई अड्डों का विकास है। संशोधित उड़ान के अंतर्गत, देशभर में क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने और विमानन अवसंरचना का विस्तार करने के लिए मौजूदा असेवित और अल्पसेवित हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डों का विकास किया जाएगा। यह घटक विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें आधुनिक अवसंरचना, बेहतर पहुंच और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विमानन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। इस उद्देश्य के लिए अगले आठ वर्षों में ₹12,159 करोड़ का परिव्यय प्रस्तावित किया गया है।
3. परिचालन और रखरखाव (O&M) सहायता
यह मानते हुए कि छोटे हवाई अड्डों की व्यवहार्यता केवल उनके निर्माण पर ही नहीं बल्कि उनके निरंतर संचालन पर भी निर्भर करती है, योजना के अंतर्गत परिचालन और रखरखाव (O&M) सहायता प्रदान की गई है। कई केवल आरसीएस के लिए संचालित हवाई अड्डों को अपने संचालन के प्रारंभिक वर्षों में सीमित राजस्व स्रोतों के साथ-साथ उच्च आवर्ती लागतों का सामना करना पड़ता है। इस चुनौती का समाधान करने के लिए, संशोधित उड़ान के अंतर्गत तीन वर्षों की अवधि के लिए O&M सहायता का प्रस्ताव किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति हवाई अड्डा प्रति वर्ष ₹3.06 करोड़ तथा प्रति हेलीपोर्ट या जल हवाई अड्डा प्रति वर्ष ₹0.90 करोड़ होगी। इस घटक के लिए ₹2,577 करोड़ का अनुमानित परिव्यय है और इससे लगभग 441 हवाई अड्डों को सहायता मिलने की उम्मीद है।
4. आधुनिक हेलीपैड का विकास
उन क्षेत्रों में पहुंच में सुधार करने के लिए, जहां पारंपरिक हवाई अड्डा अवसंरचना हमेशा व्यवहार्य नहीं हो सकती है, योजना के अंतर्गत पहाड़ी, दूरदराज, द्वीपीय और आकांक्षी क्षेत्रों में 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का प्रस्ताव है। इन क्षेत्रों में अक्सर संपर्क से संबंधित विशिष्ट बाधाएं होती हैं, विशेष रूप से वहां जहां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, आपातकालीन प्रतिक्रिया और सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता के लिए गति और पहुंच महत्वपूर्ण होती है। प्रति हेलीपैड ₹15 करोड़ की अनुमानित लागत के साथ, इस घटक के लिए अगले आठ वर्षों में कुल ₹3,661 करोड़ का अनुमानित परिव्यय है।
5. एयरलाइनों के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF)
एयरलाइन संचालकों को सहायता प्रदान करने और मार्गों के सतत विकास को प्रोत्साहित करने के लिए योजना के अंतर्गत व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण का प्रावधान जारी रखा गया है। संशोधित उड़ान के अंतर्गत दस वर्षों की अवधि में VGF के लिए ₹10,043 करोड़ का प्रस्ताव किया गया है। एयरलाइनों को पांच वर्षों के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त होगी, जिसमें तीसरे वर्ष से क्रमिक रूप से कम होने वाली वित्तीय सहायता की व्यवस्था होगी, जबकि परिचालन की विशिष्टता तीन वर्षों तक सीमित रहेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार के विकास के लिए दीर्घकालिक सहायता प्रदान करना तथा क्रमिक वाणिज्यिक स्थिरता को प्रोत्साहित करना है।
6. आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी विमानन क्षमता
योजना में आत्मनिर्भर भारत के महत्वपूर्ण आयाम को भी शामिल किया गया है, जिसके अंतर्गत दूरदराज और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में संचालन के लिए आवश्यक स्वदेशी विमानन परिसंपत्तियों के अधिग्रहण को समर्थन दिया जाएगा। ऐसे मार्गों के लिए उपयुक्त छोटे फिक्स्ड-विंग विमानों और हेलीकॉप्टरों की कमी को दूर करने के लिए पवन हंस लिमिटेड के लिए दो HAL ध्रुव हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर के लिए दो HAL डोर्नियर विमानों की खरीद का प्रस्ताव किया गया है। इस कदम से क्षेत्रीय परिचालन को मजबूत करने के साथ-साथ स्वदेशी एयरोस्पेस क्षेत्र को बढ़ावा मिलने और विमानन क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण क्षमता को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।
7. संशोधित उड़ान के लाभ
संशोधित उड़ान से देशभर में किफायती हवाई यात्रा तक पहुंच का महत्वपूर्ण रूप से विस्तार करके व्यापक आर्थिक और सामाजिक लाभ मिलने की उम्मीद है। उड़ान किराए के अंतर्गत सीटों की उपलब्धता बढ़ने से यह योजना आबादी के एक बड़े वर्ग के लिए हवाई यात्रा को सुलभ बनाएगी और करोड़ों नागरिकों तक हवाई संपर्क का विस्तार करेगी। सतत परिचालन सहायता और व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण प्रदान करके यह योजना क्षेत्रीय मार्गों की वाणिज्यिक व्यवहार्यता को मजबूत करेगी और एयरलाइनों को अल्पसेवित बाजारों तक अपने नेटवर्क का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे नए एयरलाइन संचालकों के प्रवेश को प्रोत्साहित करने और विस्तारित क्षेत्रीय विमानन सेवाओं के अवसर पैदा करने के माध्यम से भारत के विमानन पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह योजना नए हवाई अड्डों और आधुनिक हेलीपैड के निर्माण के माध्यम से विमानन अवसंरचना के विकास में तेजी लाएगी, जिससे दूरदराज, पहाड़ी, द्वीपीय और आकांक्षी क्षेत्रों में संपर्क बेहतर होगा। इन क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच आर्थिक केंद्रों, पर्यटन स्थलों और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं के साथ बेहतर एकीकरण को सुगम बनाएगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि अल्पसेवित क्षेत्र आवश्यक सेवाओं और विकास के अवसरों से जुड़े रहें। हेलीपैड और बेहतर क्षेत्रीय विमानन अवसंरचना का विकास विशेष रूप से चिकित्सा निकासी, आपदा प्रबंधन और समय-संवेदी सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं को और मजबूत करेगा। इसके अतिरिक्त, दूरदराज और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में संचालन के लिए डिजाइन किए गए विमानों और हेलीकॉप्टरों को शामिल करने से देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में संपर्क में सुधार होगा। संशोधित उड़ान स्वदेशी विमानन परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और उपयोग को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को भी आगे बढ़ाता है, जिससे घरेलू विनिर्माण को समर्थन, भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र को मजबूती और आयातित प्लेटफॉर्म पर निर्भरता में कमी आएगी। समग्र रूप से, किफायती संपर्क, मार्गों की स्थिरता, अवसंरचना विस्तार, दूरदराज के क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच, बेहतर आपातकालीन प्रतिक्रिया, घरेलू उत्पादन को समर्थन, नए एयरलाइन संचालकों को बढ़ावा और व्यापक बाजार विकास को एक साथ जोड़ते हुए, संशोधित उड़ान भारत में समावेशी और सतत विमानन विकास के अगले चरण की नींव रखता है तथा विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में योगदान देता है।
8. उड़ान योजना के अगले चरण का कार्यान्वयन
• नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अल्पसेवित और असेवित क्षेत्रों में विमानन अवसंरचना की पहचान, विकास और परिचालन के लिए उड़ान योजना के अगले चरण के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ 23 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर करके क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
• इस पहल का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संपर्क संबंधी आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप विमानन परिसंपत्तियों के विकास को सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम के दौरान माननीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने हवाई अड्डा विकास के लिए चैलेंज मोड पोर्टल का शुभारंभ भी किया और उड़ान के अगले चरण के रूट बोली प्रक्रिया के लिए योजना दस्तावेज जारी किया, जिससे देशभर में क्षेत्रीय हवाई संपर्क के विस्तार को और समर्थन मिलेगा।
• प्राथमिकता वाले मार्गों की अपनी सूची तैयार करने के लिए राज्यों को असेवित और अल्पसेवित हवाई अड्डों की सूची परिचालित की गई है।
• उड़ान योजना के अगले चरण के अंतर्गत उड़ान परिचालन शुरू करने के लिए एयरलाइनों के चयन हेतु बोली प्रक्रिया 22.09.2026 को शुरू की गई।
• बोली प्रक्रिया संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा प्रस्तावित/अनुशंसित मार्गों के आधार पर योजना के प्रावधानों और पात्रता मानदंडों के अनुसार आयोजित की जानी है।
• प्रस्तावित मार्गों का व्यवहार्यता और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके बाद पात्र एयरलाइनों/ऑपरेटरों को RCS मार्गों के संचालन के लिए बोली प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
• हवाई अड्डे के लिए चैलेंज मोड 06.10.2026 को शुरू किया गया है।
• सभी राज्यों के साथ नियमित रूप से वेबिनार आयोजित किए जा रहे हैं।
