भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (एईआरए)
भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (एईआरए) की स्थापना भारत सरकार द्वारा दिनांक 12 मई 2009 की अधिसूचना संख्या जी.एस.आर. 317(ई) के माध्यम से भारत सरकार के एक वैधानिक निकाय के रूप में की गई थी। भारत की संसद ने "भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008" (जिसे आगे "अधिनियम" कहा जाएगा) अधिनियमित किया। उक्त अधिनियम के अंतर्गत "भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण" (जिसे आगे "एईआरए" कहा जाएगा) नामक एक वैधानिक प्राधिकरण की स्थापना का प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य वैमानिक सेवाओं के लिए शुल्क का विनियमन करना, प्रमुख विमानपत्तनों पर प्रदान की जाने वाली सेवाओं के लिए अन्य विमानपत्तन शुल्क निर्धारित करना तथा ऐसे विमानपत्तनों के प्रदर्शन मानकों की निगरानी करना है। उक्त अधिनियम के प्रावधान 1 सितम्बर, 2009 से प्रभावी हुए।
प्रमुख विमानपत्तनों के संबंध में एईआरए के कार्य अधिनियम की धारा 13 में निम्नानुसार निर्दिष्ट किए गए हैं:
- विमानपत्तन सुविधाओं के सुधार हेतु किए गए पूंजीगत व्यय तथा समयबद्ध निवेश को ध्यान में रखते हुए वैमानिक सेवाओं के लिए शुल्क निर्धारित करना।
- दक्षता में सुधार की लागत का निर्धारण करना।
- प्रमुख विमानपत्तनों के आर्थिक एवं व्यवहार्य संचालन को सुनिश्चित करना।
- केंद्र सरकार द्वारा किसी समझौते, समझौता ज्ञापन अथवा अन्य किसी माध्यम से प्रदान की गई रियायतों को ध्यान में रखना।
- अधिनियम के उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रासंगिक अन्य किसी भी कारक पर विचार करना।
- विकास शुल्क (Development Fee) की राशि निर्धारित करना।
- विमान अधिनियम, 1934 के अंतर्गत बनाए गए विमान नियम, 1937 के नियम 88 के तहत लगाए जाने वाले यात्री सेवा शुल्क (Passenger Service Fee) की राशि निर्धारित करना।
- केंद्र सरकार अथवा उसके द्वारा इस संबंध में अधिकृत किसी प्राधिकरण द्वारा निर्दिष्ट सेवा की गुणवत्ता, निरंतरता एवं विश्वसनीयता से संबंधित निर्धारित प्रदर्शन मानकों की निगरानी करना।
- वैमानिक सेवाओं के लिए शुल्क निर्धारण हेतु आवश्यक किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त करना।
- शुल्क संबंधी ऐसे अन्य कार्य करना जो केंद्र सरकार द्वारा सौंपे जाएं अथवा अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए आवश्यक हों।
वर्तमान में भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण प्रमुख विमानपत्तनों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, विमानपत्तन सुविधाओं में निवेश को प्रोत्साहित करने, उपयोगकर्ताओं के उचित हितों की रक्षा करने तथा वैमानिक सेवाओं/गतिविधियों के लिए शुल्क विनियमन के माध्यम से कुशल, आर्थिक एवं व्यवहार्य विमानपत्तनों के संचालन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। साथ ही यह प्रमुख विमानपत्तनों पर प्रदर्शन मानकों की निगरानी भी करता है।
पता:
श्री एस.के.जी. रहाटे, आईएएस (सेवानिवृत्त), अध्यक्ष,
एईआरए भवन, सफदरजंग हवाई अड्डा, नई दिल्ली – 110003।
