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Swachh Bharat

फोकस में

  • संबद्ध/स्वाियत्ताशासी संगठन नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए)

    नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) नागर विमानन क्षेत्र में नियामक निकाय है जो कि मुख्यवत: संरक्षा संबंधी मामलों को देखती है। यह भारत के लिए/से विमान परिवहन सेवाओं के विनियमन तथा नागर विमानन विनियमों, विमान सुरक्षा तथा उड़नयोग्य ता मानदंडों को लागू करने के लिए उत्र्विमदायी है। डीजीसीए अंतरराष्ट्रीोय नागर विमानन संगठन (इकाओ) के साथ सभी विनियामक कार्यों में समन्वोयन का कार्य भी करता है। भारत विमानन उद्योग वैश्विगक रूप से सबसे तीव्र विकास करने वाला सेक्टनर है। आधे दशक के पूर्व में उदारीकरण का अभियान आरंभ होने के परिणामस्व्रूप इस सेक्ट‍र में तेजी से बदलाव आया है। भारत में नागर विमानन उद्योग की मूल शुरूआत 1912 में हुई जब पहली विमान उड़ान कराची तथा दिल्ली के बीच यू;के. की इम्पीहरियल एयरवेज के सहयोग से इंडियन स्टेकट एयर सर्विसेज द्वारा शुरू की गई। यह एक इम्पी;रियल एयरवेज का लंदन-कराची उड़ान का विस्ता्र था। वर्ष 1932 में, जेआरडी टाटा द्वारा संस्थाीपित टाटा एयरलाइन पहली भारतीय एयरलाइन थी। स्वथतंत्रता के समय, नौ विमान परिवहन कंपनियों द्वारा एयर कार्गो तथा या‍त्रियों दोनों का वहन किया जा रहा था। 1948 के प्रारंभ में, भारत सरकार द्वारा 2 करोड़ रूपए की पूंजी तथा लॉकहीड कांस्टे लेशन विमान के साथ एअर इंडिया (पूर्ववर्ती टाटा एयरलाइन) के सहयोग से एअर इंडिया इंटरनेशनल लिमिटेड नामक संयुक्तक उद्यम कंपनी की स्थाूपवना की गई। एअर इंडिया इंटरनेशनल लिमिटेड की उदघाटन उड़ान 8 जून, 1948 को मुम्बाई- लंदन वायुमार्ग पर शुरू हुई। सरकार द्वारा एयर कार्पोरेशन अधिनियम, 1953 के तहत नौ एयरलाइन कंपनियों का राष्ट्री यकरण किया गया। इन सरकारी स्वाममित्वन वाली एयरलाइनों का 1990 के मध्यि तक भारतीय विमानन उद्योग में प्रभुत्वा रहा। अप्रैल, 1990 में, सरकार द्वारा खुली आकाश नीति को स्वीभकार किया गया और विमान टैक्सीस प्रचालकों को चार्टर तथा गैर चार्टर दोनों आधार पर किसी भी हवाईअड्डे से प्रचालन करने की अनुमति दी गई और उन्हेंक स्वगयं उड़ान शेड्यूल, कार्गो एवं यात्री किरायों को निर्धारित करने की भी अनुमति दी गई। 1994 में खुली आकाश नीति के हिस्सेक के रूप में, सरकार ने विमान परिवहन सेवाओं में इंडियन एयरलाइंस और एअर इंडिया के एकाधिकार को समाप्तं कर दिया। बहरहाल, किसी भी विदेशी एयरलाइन का प्रत्यंक्ष अथवा अप्रत्यपक्ष रूप से घरेलू एयरलाइन कंपनी में इक्विटी हिस्सेरदारी नहीं है। 1995 तक, विमानन व्यूवसाय में अनेक निजी एयरलाइनें शामिल हो गई और घरेलू विमान यातायात में उनका हिस्साक 10 प्रतिशत से भी अधिक हो गया। आज, भारतीय विमानन उद्योग में निजी एयरलाइनों का प्रभुत्व1 हो गया है और इनमें कम लागत वाले विमावाहक शामिल हैं जिनके आने से वायु यात्रा वहनीय हो गई है।

    • सिविल विमान का पंजीकरण
    • भारत में पंजीकृत सिविल विमान के लिए उड़नयोग्यनता के लिए मानदंडों का गठन और ऐसे विमान के लिए उड़नयोग्यमता प्रमाणपत्र देना।
    • पायलटों, विमान अनुरक्षण इंजीनियरों तथा उड़ान इंजीनियरों को लाइसें‍स देना तथा इस प्रयोजन से परीक्षण तथा जांच आयोजन करना
    • विमान यातायात नियंत्रकों को लाइसेंस देना
    • एयरोड्रम तथा सीएनएस/एटीएम सुविधाओं का प्रमाणन
    • भारतीय वाहकों के लिए विमान प्रचालक प्रमाण पत्र प्रदान करना तथा भारतीय एवं विदेशी प्रचालकों द्वारा भारत के भीतर/बाहर के लिए/से विमान परिवहन सेवाओं के प्रचालन का विनियमन करना जिनमें ऐसे प्रचालकों के अनुसूचित और गैर अनुसूचित के क्लियरेंस शामिल हैं।
    • दुर्घटनाओं/घटनाओं की जांच करना तथा संरक्षा विमानन प्रबंधन कार्यक्रम के गठन एवं कार्यान्वटयन सहित दुर्घटना निवारक उपाय लागू करना
    • विमान अधिनियम, विमान नियम तथा इकाओ अनुबंधों में संशोधनों का अनुपालन करने के लिए नागर विमानन अपेक्षाओं में संशोधन करना तथा किसी अन्यश अधिनियम में संशोधन के लिए अथवा एक अंतरराष्ट्रीरय अभिसमय को प्रभावशाली बनाने के लिए अधिनियम को पास करने अथवा मौजूदा अभिसमय में संशोधन करने के लिए प्रस्ताअव तैयार करना।
    • सिविल तथा मिलिट्री विमान यातायात एजेंसियों द्वारा वायुक्षेत्र के फ्लैक्सीय प्रयोग हेतु राष्ट्री य स्तिर पर समन्वबयन तथा भारतीय वायु क्षेत्र द्वारा सिविल प्रयोग हेतु अधिक वायु मार्गों के प्रावधान के लिए इकाओ के साथ बातचीत करना।
    • इकाओ के अनुबंध-16 के अनुसार विमान की ध्वनि तथा इंजन उत्ससर्जन पर निगरानी रखना तथा यदि आवश्यरकता हो इस मुद्दे पर पर्यावरण प्राधिकरणों के साथ समन्वउय करना।
    • उत्प्रेारक एजेंट के रूप मे कार्य करते हुए घरेलू डिजाइन तथा विमान व विमान पुर्जों के विनिर्माण का संवर्धेन।
    • खतरनाक सामान के वहन के लिए प्रचालकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को स्वी कृति प्रदान करना तथा खतरनाक सामानों के वहन के लिए प्राधिकार जारी करना आदि।
  • नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो

    आरंभिक तौर पर नागर विमानन सुरक्षा ब्यूुरो की स्थापना पांडे समिति की सिफारिशों पर जनवरी, 1978 में नागर विमानन महानिदेशालय में एक प्रकोष्ठा के रूप में हुई थी। 01 अप्रैल, 1997 को नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो की  पुन:स्थापना नागर विमानन मंत्रालय में एक स्वतंत्र विभाग के रूप में हुई। नागर विमानन सुरक्षा ब्यूोरो के मुख्य उत्तरदायित्व में भारत में अंतरराष्ट्रीय तथा घरेलू हवाईअड्डों पर नागरिक उडानों के संबंध में मानकों तथा उपायों का निर्धारित करना शामिल है। नगर विमानन सुरक्षा ब्यूरो का मुख्य कार्यालय ए-विंग, I-III तल, जनपथ भवन, नई दिल्ली 110001 में स्थित है। इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय अंतरराष्ट्रीरय हवाई अडडों यथा दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता तथा चेन्नई में स्थित है।

    • हवाई अड्डा संचालकों,एयरलाइंस ऑपरेटरों के लिए आईसीएओ के शिकागो सम्मेलन के लिए अनुलग्नक 17 के अनुसार उड्डयन सुरक्षा मानक,और उनकी सुरक्षा एजेंसियों ए वी एस ई सी उपायों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं।
    • सुरक्षा नियमों तथा विनियमों की मॉनीटरिंग और सुरक्षा आवश्यमकताओं के लिए सर्वेक्षण करना।
    • यह सुनिश्चित करना कि सुरक्षा नियंत्रणों को लागू करने वाले व्यक्ति उपयुक्तत रूप से प्रशिक्षित हों तथा अपने कर्तव्यों के निष्पादन के लिए अपेक्षित सभी सक्षमताएं ग्रहण किए हों।
    • विमानन सुरक्षा विषयों का नियोजन तथा समन्वेय।
    • सुरक्षा कार्मिकों की प्रवीणता कौशल तथा सतर्कता की जांच करने के लिए औचक/डमी जांचें करना।
    • आकस्मिक जांचों की कुशलता तथा विभिन्न एजेंसियों की प्रचा‍लनिक तत्पमरता की जांच करने के लिए मॉक अभ्यास।
  • रेल संरक्षा आयोग(सीआरएस)

    रेल संरक्षा आयोग, जो नागर विमानन मंत्रालय तथा भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्यरत है, रेल प्रचालन की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर कार्य करता है और रेल अधिनियम(1989) में निर्धारित कतिपय सांविधिक कार्यों से प्रभारित है, जो कार्य निरीक्षणीय, जांच तथा सलाहकार प्रकृति के हैं। आयोग का सर्वाधिक महत्वापूर्ण दायित्वै यह सुनिश्चित करना है कि यात्री यातायात के लिए आरंभ होने वाली कोई नई लाइन यात्री यातायात के वहन के हर दृष्टिकोण से सुरक्षित है। यह अन्यआ कार्यों पर भी लागू है जैसे आमान परिवर्तन, लाइन दोहरीकरण तथा मोजूदा लाइनों का विद्युतीकरण। आयोग भरतीय रेलों में हुई गंभीर रेल दुर्घटनाओं की सांविधिक जांच भी करता है और भारत में रेल की सुरक्षा में सुधार के लिए सिफारिशें भी करता है।

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